ख्वाब

Patna

 

 

 

 

 

आज फिर चाहत की पतंग उड़ने को जी चाहता है,
खुली हवा में सांस लेने का ज़िर्क जो किया किसी ने,
अँधेरी राहों से गुज़रते हुए,
सूरज की लहराई हुई रौशनी को छूने कॊ दिल करता है|
लहराता चलूँ ख्वाब के पंखों को,
नील सी आसमान के बीच मुस्कराती हुई
रुई सी बादलों में सोने का दिल करता है|
बारिश की बूँदें जो गिरी थी
भिगो गयी थी जज़बातों को,
उन बारिश के पार जाने को दिल करता है |

I'm a business analyst. I have a background in Sales, Engineering, MBA and analytics. I enjoy photography.

3 Comments

  1. hem lata
    November 18, 2015

    bahut badhiya

    Reply
    1. Asitav Sen
      November 19, 2015

      thanks!

      Reply
  2. Maneesh Kumar
    January 26, 2016

    wow sir you are great…

    Reply

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