इंतज़ार

 

अब सूर्योदय की एक और लालसा,
अपने आगमन के लिए इंतजार कर रहा है,
अब एक और सपना है,
सच होने की प्रतीक्षा कर रहा है,
अब एक और रेत टिब्बा,
तूफान की राह देख रहा है ,
प्यासी यह कानों की जोड़ी,
उस राग की अपेक्षा में है,
यह सच है कि यह सारी बातें सच होंगी,
कोई शक नहीं है;
पर क्या मैं साक्षी बनकर रह पाऊँगा, या पाऊँगा महसूस करने,
क्या जीवन इतना वक़्त देगी मेरे को?
© Asitav

I'm a business analyst. I have a background in Sales, Engineering, MBA and analytics. I enjoy photography.

1 Comment

  1. Soma
    September 21, 2010

    Suraj ki kiran tujhe kal hi dikhegi.. raag tujhe aaj hi sunne to milega!! Balu ke tibbein tujhe shayad baad mein dikh jaye… uska intezaar rahega tujhe!

    Reply

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