कश्मकश कुछ कम नहीं की थी किसी ने, मंजिल की तलाश में । पैरों पे खड़े तो हो गए हैं दुनिया कहती है, ये दिल जानता की कितना झुकना पड़ गया ।
कश्मकश कुछ कम नहीं की थी किसी ने, मंजिल की तलाश में । पैरों पे खड़े तो हो गए हैं दुनिया कहती है, ये दिल जानता की कितना झुकना पड़ गया ।
नमी सी दिख तो रही है आँखों में , पर रोने के लिए शायद वक़्त ही नहीं । ग़ुलामी का दौर सदियों से चल रहा है, अब तो आदत सी हो गयी है ।
এ অপেক্ষার শেষ নেই, ভালবাসা টুকু শুধু আছে, আশা টাও তাই, এ অপেক্ষার কোনো শেষ নেই|
आज फिर चाहत की पतंग उड़ने को जी चाहता है, खुली हवा में सांस लेने का ज़िर्क जो किया किसी ने, अँधेरी राहों से गुज़रते हुए, सूरज की लहराई हुई रौशनी को छूने तो दिल करता है| लहराता चलूँ ख्वाब के पंखों को, नील सी आसमान के बीच मुस्कराती हुई रुई सी बादलों में सोने का दिल करता है| बारिश की बूँदें जो गिरी थी भिगो Read More ...
আমি জানি, আমি বুঝি, এটুকু পথ ই, চলার ছিল, এটুকু গল্প হওয়ার ছিল| তবু মন তো আর বোঝে না, তাই এড়িয়ে চলার ভাবনা, এসেও, হারিয়ে যাওয়ার ছিল| তুমি, আকাশছোয়া স্বপ্ন নিয়ে থাক , আমি থাকি মাটির ধারে , তুমি, হারিয়ে যাও মানব নির্মিত প্রকৃতি তে, আমি হারিয়ে যাই মানুষ, মুখোশ আর হাসি তে| স্বাধীনতার মানে যেথা খোলা আকাশ, স্নিগ্ধ হাওয়া মন খুলে হাসি, চারিদিক সব্চ্ছল, শিমানাবদ্ধ হয়েও যেমন অসীম হয়ে Read More ...